बुध देव की उत्पत्ति की कथा-Budh Dev Ki Utpatti Ki Katha

बुध देव की उत्पत्ति की कथा-Budh Dev Ki Utpatti Ki Katha

बुध देव की उत्पत्ति- भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसी मान्यता है कि मनुष्य के जीवन को ग्रहों की चाल संचालित करती है| व्यक्ति के जन्म के समय उनकी जन्म कुंडली में स्थित ग्रहों की जो दशा होती है उसी के आधार पर उसके सम्पूर्ण भविष्य का आकलन किया जाता है| लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन सभी नव ग्रहों की उत्पति कैसे हुई| या फिर ये सभी नव ग्रह एक-दूसरे के मित्र या शत्रु कैसे हैं?

आधुनिक विज्ञान के पास तो इन सवालों के जवाब आपको नहीं मिलेंगें लेकिन हमारे हिन्दू  धार्मिक ग्रंथों में ऐसी अनेक कथाएं मौजूद हैं| इन हिन्दू धर्म ग्रंथो में  इनकी उत्पति व आपसी संबंध को विस्तार से बताया गया है | बुध ग्रह को बुद्धि का कारक माना जाता है तो इन्हें गंधर्वों का प्रणेता भी| बुद्धि का स्वामी बृहस्पति को माना जाता है तो गंधर्व विशेषज्ञ चंद्रमा को कहा जाता है। अब बुध में ये दोनों गुण कैसे आये? इस बारे में एक बड़ी रोमांचक कथा है आइये जानते हैं बुध की कहानी क्या कहती है।

बुध देव के जन्म की पौराणिक कथा

हिन्दू धर्म में ज्योतिष के अनुसार नव ग्रहों को मान्यता दी गयी है| और इन नव ग्रहों में ग्रहों के राजा सूर्य देव हैं जो कि इन सभी नव ग्रहों का प्रतिनिधत्व करते हैं| इन सभी नव ग्रहों का अपना एक विशिष्ट स्थान है और सबकी अपनी-अपनी विशेषताएँ हैं| पर इन सभी नव् ग्रहों में वृहस्पति ग्रह को बहुत विशेष स्थान है क्यों कि बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना जाता है।

हिन्दू धर्म के समस्त देवता उनसे परामर्श लेते थे। उनमे से चंद्रमा भी बृहस्पति के शिष्य थे। चन्द्रमा जो कि दिखने में बहुत ही सुन्दर आकर्षक और शीतल प्रतीत होते हैं| गुरु बृहस्पति पत्नी थीं तारा जो कि बहुत ही सुंदर थी| और वैसे भी चंद्रमा को तो सभी सुंदर मानते ही हैं बल्कि उन्हें तो सुंदरता का ही दूसरा रूप माना जाता है|

अब गुरु पत्नी तारा चंद्रमा की सुन्दरता देख कर उस पर मोहित हो गई और उनके प्रेम में पड़ गई| चंद्रमा भी गुरु पत्नी के प्रेमपाश में बंध गये| यहां तक कि गुरु पत्नी तारा ने अपने पति बृहस्पति को छोड़कर चंद्रमा के साथ रहना शुरु कर दिया|

गुरु बृहस्पति ने उन्हें बहुत समझाया और वापस आने की बात कही लेकिन वे नहीं मानी| इसका परिणाम यह हुआ कि गुरु  बृहस्पति अपने पत्नी तारा पर क्रोधित हो गये और चंद्रमा के साथ युद्ध करने की ठान ली|

वे देवताओं के गुरु थे इसलिये सभी देवता बृहस्पति के पक्ष में खड़े हो गये| उधर शत्रु के शत्रु को मित्र मानकर दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने चंद्रमा का साथ देने का मन बना लिया| गुरु बृहस्पति और चन्द्रमा के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया और सृष्टि में भारी तबाही होने लगी|

 यह द्वंद युद्ध तारा की कामना के लिये हुआ था इसलिये हिन्दू धर्म पुराणों में इस युद्ध को तारकाम्यम युद्ध कहा गया। अब सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी परेशान हो गये और सोचने लगे कि इस अनर्थ को कैसे रोका जाये| जैसे-तैसे वे गुरु बृहस्पति और चंद्रमा के युद्ध के बीच में कूदे और तारा को समझा-बुझाकर वापस बृहस्पति को सौंप दिया गया|

गुरु बृहस्पति और चन्द्रमा के मध्य युद्ध के समाप्त होने के  कुछ समय पश्चात ही तारा ने एक पुत्र को जन्मदिया और उसका नाम रखा गया बुध| बुध बहुत ही सुंदर थे वे इतने सुन्दर थे कि कोई भी उसे अपना कहने लगे| गुरु बृहस्पति चूंकि तारा के पति थे उनका उसे अपना कहना स्वाभाविक था लेकिन चंद्रमा ने भी बुध को अपना पुत्र होना का दावा किया|

गुरु बृह्सपति और चंद्रमा के बीच एक बार फिर स्थिति तनावपूर्ण होने लगी। बृहस्पति और चंद्रमा के दावे के बीच तारा शांत खड़ी देखती रही यह सब देखकर बुध भी आश्चर्य में पड़  गये और क्रोधित होकर अपनी माता से सत्य बताने को कहा कि मेरा पिता कौन है| तब उनकी माँ तारा ने कहा कि तुम चंद्रमा के पुत्र हो| मान्यता है कि गंभीर और तीक्ष्ण बुद्धि का बालक होने के कारण ही ब्रह्मा जी ने इनका नाम बुध रखा था|

बुध देव के जन्म की एक और अन्य कहानी है लेकिन उस कहानी के अनुसार चंद्रमा अपने गुरु की पत्नी तारा पर मोहित हो गये और गुरु पत्नी तारा को पाने की लालसा में उनका अपहरण कर लिया| चंद्रमा और तारा के संबंध से बुध उत्पन्न हुए|

बुध के जन्म के उपरांत चंद्रमा ने उन्हें अपना पुत्र घोषित करते हुए बुध का जातकर्म संस्कार करना चाहा तो देव गुरु बृहस्पति अत्यंत क्रोधित गये| बुध की सुंदरता उसकी कांति को देख बृहस्पति उसे अपना पुत्र मानने को तैयार थे लेकिन विवाद बढता गया और ब्रह्मा जी के हस्तक्षेप के बाद तारा ने स्वीकार किया की बुध चंद्रमा का पुत्र है|

इस प्रकार चंद्रमा ने उसका नामकरण संस्कार किया और उसे बुध का नाम दिया गया| चूँकि ब्रम्हा के हस्तक्षेप के बाद तारा को देव गुरु बृहस्पति को वापस सौंप दिया गया था| अब चंद्रमा ने सोचा कि उनके पुत्र बुध का लालन पालन कौन करेगा| चूँकि बुध अत्यंत सुन्दर थे उनकी सुन्दरता पर हर कोई मोहित हो जाता| और उन्हें अपना मानने लगता इसलिए चन्द्रमा ने बुध के लालन-पालन की जिम्मेदारी अपनी प्रिय पत्नी रोहिणी को सौंपा दिया| इसी कारण से बुध देव को रौहिणेय भी कहा जाता है|

चंद्रमा के गुण बुध में जन्मजात थे तो बृहस्पति ने उसे अपना पुत्र स्वीकार किया इस कारण बृहस्पति के गुण भी बुध में सम्मलित हैं। इसी कारण से बुध देव को गंधर्व विद्या का प्रणता तो बुद्धि का कारक माना जाता है| लेकिन चंद्रमा ने तारा के साथ छल किया इस कारण बुध को अपने पिता से ये नकारात्मक प्रभाव भी विरासत में मिले| विशेषकर जब किसी भी जातक की जन्म कुंडली के सप्तम स्थान में बुध स्थित हों बुध को छल कपट करवाने वाला माना जाता है|

ये हैं बुध ग्रह के उपाय,बुध को अनुकूल कैसे करें

बुध ग्रह का शुभा-शुभ प्रभाव एवं बुध ग्रह के उपाय

  • बुध ग्रह हमारे सौरमंडल का सबसे छोटा और बुध के सबसे निकट में स्थित ग्रह है|
  • बुध देव चंद्रमा के पुत्र हैं|
  • सभी नौ ग्रहों में बुध ग्रह को राजकुमार की उपाधि दी गई है|
  • बुध ग्रह भगवान श्री हरि विष्‍णु का प्रतिनिधित्‍व करते हैं|
  • धन, वैभव और सुख – समृद्धि का कारक बुध ग्रह ही को कहा जाता है| बुध को वाणी, बुद्धि, त्‍वचा और मस्तिषक की तंत्रिका तंत्र का कारक भी कहा गया है| बुध ग्रह व्यक्ति को ज्ञान, वाकपटुता, की क्षमता प्रदान करता है|
  • बुध ग्रह व्यक्ति के दांतों, गर्दन, त्वचा व कंधे पर अपना प्रभाव डालता है| बुध ग्रह कन्या राशि में उच्च एवं मीन राशि में नीच का होता है|
  • बुध ग्रह की दिशा उत्तर है जो कुबेर देव की दिशा भी कही गयी है| बुध की कृपा से व्‍यक्‍ति हर मुश्किल परिस्थिति में सामंजस्य बना लेता है|

जानिये बुध गृह के अशुभ प्रभाव

  • ध्यान रखे यदि आप पर बुध ग्रह का अशुभ प्रभाव पड़ रहा है तो आपको व्यापार, दलाली, नौकरी आदि कार्यों में नुकसान उठाना पड़ेगा|
  • आपकी सूंघने की शक्ति कमजोर हो जाएगी| समय पूर्व ही दांत खराब हो जाएंगे|
  • आपके मित्रों से संबंध बिगड़ जाएंगे|
  • आपकी संभोग की शक्ति क्षीण हो जाएगी|
  • बहन, बुआ और मौसी किसी विपत्ति में है| तो भी आपका बुध ग्रह अशुभ प्रभाव वाला माना जाएगा|
  • इसके अलावा यदि आप तोतला कर बोलते हैं तो भी बुध ग्रह अशुभ माना जाएगा| व्यक्ति खुद ही अपने हाथों से बुध ग्रह को खराब कर लेता है, जैसे यदि आपने अपनी बहन, बुआ और मौसी से संबंध बिगाड़ लिए हैं तो बुध ग्रह विपरीत प्रभाव देने लग जाता है|
  • कुंडली में यदि बुध ग्रह केतु और बुध के साथ बैठा है तो यह मंदा फल देना शुरू कर देता है| शत्रु ग्रहों से ग्रसित बुध का फल मंदा ही रहता है| ऐसे में यह उपरोक्त सभी तरह के संकट खड़े कर देता है तथा बुध खराब होने से व्यापारियों का दिया या लिया धन अटकने लगता है|
    आठवें भाव में बुध ग्रह बुध और चंद्र के साथ बैठा है तो पागलखाना, जेलखाना या दवाखाना किसी भी एक की यात्रा करा देता है| हालांकि बुध ग्रह को अच्‍छे प्रभाव देने वाला भी बनाया जा सकता है|

जानिये बुध गृह के शुभ प्रभाव

  • बुध ग्रह जब शुभ फल प्रदान करता है तो जातक कम मेहनत करके भी अधि‍क कमाई करता है|
  • जातक की बहन, बुआ और बेटी का जीवन सुखमय रहता है और आपसी प्रेम बना रहता है|
  • इस प्रकार का जातक बुद्ध‍िमान होता है और बुद्धि‍ के बल पर व्यापार में उन्नति करता है|
  • पढ़ाई-लिखाई के मामले में भी जातक बहुत अच्छा होता है|
  • इसके अतिरिक्त यदि बुध ग्रह शुभ प्रभाव दे रहा है तो वह आपमें बोलने की क्षमता का विकास करेगा| आपको ज्ञानी और चतुर बनाएगा|
  • आपकी देह सुंदर और सोच स्पष्ट होगी| आपकी बातों का लोगो पर असर होगा| ऐसे में आपकी सूंघने की शक्ति गजब की होती है|
  • व्यापार और नौकरी में किसी भी प्रकार की अड़चन नहीं आएगी और आप उन्नति करते जाएंगे|
  • ध्यान रखे ईमानदारी और सच्चाई छोड़ देने से बुध ग्रह अपना शुभ प्रभाव छोड़ देता है|

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