मंगल ग्रह की उत्पत्ति की कथा-Mangal Grah Ki Utpatti Ki Katha

मंगल ग्रह की उत्पत्ति की कथा-MANGAL GRAH KI UTPATTI Ki Katha

मंगल ग्रह की उत्पत्ति– हिन्दू धर्म के ज्योतिष शास्त्र में माना गया है कि मंगल एक क्रूर ग्रह है| यह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है| इसलिए मेष और वृश्चिक राशि के लोगों को क्रोध अधिक आता है| वैदिक ज्योतिष में इसे जोश, उत्साह, ऊर्जा, क्रोध, भूमि, रक्त, लाल रंग, सैन्य शक्ति, खेलकूद आदि का कारक माना जाता है| मंगल ग्रह के कारण ही कुंडली में मांगलिक दोष पैदा होता है| पौराणिक कथा के अनुसार, मंगल देव भगवान शिव के अंश हैं। मंगल देव का जन्म सृष्टि के संहारक भगवान शिव के पसीने से हुआ था।

हिन्दू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है| मंगल से प्रभावित व्यक्ति यदि अपनी ऊर्जा का रचनात्मक व सकारात्मक इस्तेमाल करे तो उसकी प्रसिद्धि की गूंज हर दिशा में सुनाई दे सकती है| लेकिन यदि इस तरह के व्यक्ति नकारात्मक रास्तों पर निकल पड़ें तो वह बड़े स्तर पर विध्वंस भी कर डालते हैं| ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को युद्ध का देवता भी माना जाता है।

मंगल की तुलना अक्सर पृथ्वी से की जाती है और वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना बहुत अधिक है और इसीलिये दुनियाभर के वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाओं को तलाशने में लगे हैं| लेकिन हिंदूओं के पौराणिक ग्रंथों में तो मंगल का पृथ्वी से सीधा संबंध बताया गया है| उसे पृथ्वी का पुत्र माना जाता है और भौमेय कहा जाता है। आइये जानते हैं मंगल ग्रह से जुडी उनके जन्म की एक पौराणिक कथा|   

मंगल ग्रह की उत्पत्ति की पौराणिक कथा

भारतीय पौराणिक ग्रंथो में स्कंद पुराण के अनुसार, एक समय उज्जयिनी पुरी (जिसे हम उज्जैन के नाम से जानते हैं) में अंधक नाम से प्रसिद्ध दैत्य राज्य करता था|  उसके महापराक्रमी पुत्र का नाम कनक था| कहते हैं एक बार कनक दानव ने युद्ध के लिए इन्द्र को ललकारा तब इन्द्र ने युद्ध में उसका वध कर दिया|

उधर, जब अंधकासुर को अपने पुत्र के वध की खबर मिली तो यह  सुनकर अपना आपा खो बैठा, उसने इंद्र को मारने का मन बना लिया| अंधकासुर इंद्रा के मुकाबले बहुत ही शक्तिशाली था| इंद्र उसकी शक्ति के आगे कुछ भी नहीं थे। इसलिए इंद्र ने अपनी प्राण की रक्षा करने के लिए भगवान शिव की शरण में जा पहुँचे| 

मंगल देव भगवान शिव के अंश हैं

इंद्रा देव ने भगवान शिव से प्रार्थना करते हुए कहा, हे भगवन ! मुझे अंधकासुर से अभयदान दीजिए| इन्द्र का वचन सुनकर शरणागत वत्सल शिव ने इंद्र को अभयदान प्रदान किया और अंधकासुर को युद्ध के लिए ललकारा, युद्ध अत्यंत घमासान हुआ, और उस समय लड़ते-लड़ते भगवान शिव के मस्तक से पसीने की एक बूंद पृथ्वी पर गिरी, और इसी बूंद से अंगारे की तरह बिल्कुल लाल अंग वाले भूमिपुत्र मंगल का जन्म हुआ| इसलिए मंगल देव  का स्वभाव क्रूर माना जाता है। उन्हें गुस्सा शीघ्र ही आ जाता है। और यही मंगल से प्रभावित जातक या व्यक्तियों के साथ भी ऐसा माना गया है कि उन्हें भी अतिशीघ्र ही गुस्सा आ जाता है|

मंगल ग्रहकी उत्पति के एक कथाऔर है। यह कथा है ब्रह्म वैवर्त पुराण का| इसमें लिखा है कि हिरण्यकश्यप के भाई हिरण्याक्ष ने एक बार पृथ्वी को चुरा लिया और उसे सागर में ले गया| तब उसे बचाने के लिये भगवान विष्णु ने वाराह अवतार लिया और हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को रसातल से निकाल सागर पर स्थापित किया|

इसके बाद ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना करने लगे। उधर पृथ्वी अपने को बचाने वाले वाराह रूपी विष्णु पर सकाम होकर उनकी वंदना करने लगी| वाराह रूपी विष्णु भी स्वंय को रोक नहीं पाये और कामवश होकर पृथ्वी संग रति क्रीड़ा की| विष्णु और पृथ्वी के इसी संयोग से कालातंर में पृथ्वी ने एक बहुत ही तेजस्वी बालक को जन्म दिया जिसे मंगल कहा गया|मंगल के जन्म की यही कहानी देवी भागवत में भी मौजूद है|

उज्जैन है मंगल देव जन्म स्थान  

पौराणिक कथा के अनुसार मंगल देव कि स्तुति अंगारक, रक्ताक्ष और महादेव पुत्र, इन नामों से स्तुति कर ब्राह्मणों ने उन्हें ग्रहों के मध्य प्रतिष्ठित किया, इसके बाद उसी स्थान पर ब्रह्मा जी ने मंगलेश्वर नामक उत्तम शिवलिंग की स्थापना की| वर्तमान में यह स्थान मंगलनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है, जो उज्जैन में स्थित है| मंगल ग्रह की शांति के लिए यहां उनकी पूजा आराधना की जाती है|

मंगल ग्रह की शांति के अचूक उपाय

यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में मंगल ग्रह किसी प्रकार से दूषित है या पीड़ित है या अशुभ है | तो उस व्यक्ति को सर्वप्रथम अपनी जन्म कुंडली का किसी सिद्ध ज्योतिषी से विश्लेषण करवा कर ही किसी प्रकार के उपायों को करना चाहिये |

यहाँ पर निम्न उपाय बताये जा रहे हैं परन्तु आपसे निवेदन है कि कृपया किसी भी ग्रह के उपाय को करने के पूर्व सर्वप्रथम अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण अवश्य करायें और उसके पश्चात ही ज्योतिषी द्वारा बताये गए उपाय को करें|

  • मंगलवार को “सुन्दरकाण्ड” एवं “बालकाण्ड” का पाठ करना लाभकारी होता है |
  • श्री स्कन्द पुराण में वर्णित “मंगल स्त्रोत” का नित्य श्रद्धा पूर्वक पाठ करने से मंगल के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है. 
  • क़र्ज़ की स्तिथि में “ऋण मोचक मंगल स्तोत्र“ का नित्य पाठ कारगर साबित होता है.
  • अधिक क़र्ज़ की स्तिथि में “ऋण मोचक मंगल अनुष्ठान” ही अचूक उपाय है. 
  • “माँ मंगला गौरी“ की आराधना से भी मंगल दोष दूर होता है |
  • कार्तिकेय जी की पूजा से भी मंगल दोष के दुशप्रभाव में लाभ मिलता है |
  • भगवान शिव की स्तुति करें।
  • ज्योतिषीय परामर्श के बाद मूंगे को धारण करें।
  • तांबा, सोना, गेहूं, लाल वस्त्र, लाल चंदन, लाल फूल, केशर, कस्तूरी , लाल बैल, मसूर की दाल, भूमि आदि का दान।
  • मंगली कन्यायें गौरी पूजन तथा मंगल यंत्र की नियमित पूजा अर्चना करें.
  • मंगल दोष द्वारा यदि कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो | तो कन्या को शयनकाल में सर के नीचे हल्दी की गाठ रखकर सोना चाहिए| और नियमित सोलह गुरूवार पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाना चाहिए |
  • मंगलवार के दिन व्रत रखकर हनुमान जी की पूजा करें|और “हनुमान चालीसा“ का पाठ करने से| और हनुमान जी को सिन्दूर एवं चमेली का तेल अर्पित करने से मंगल दोष शांत होता है |
  • “महामृत्युजय मंत्र“ का जप हर प्रकार की बाधा का नाश करने वाला होता है| महामृत्युजय मंत्र का जप करा कर मंगल ग्रह की शांति करने से भी वैवाहिक व दांपत्य जीवन में मंगल का कुप्रभाव दूर होता है |
  • यदि कन्या मांगलिक है| तो मांगलिक दोष को प्रभावहीन करने के लिए विवाह से ठीक पूर्व कन्या का विवाह शास्त्रीय विधि द्वारा प्राण प्रतिष्ठित श्री विष्णु प्रतिमा से करे| तत्पश्चात विवाह करे |
  • यदि वर मांगलिक हो तो विवाह से ठीक पूर्व वर का विवाह तुलसी के पौधे के साथ या जल भरे घट (घड़ा) अर्थात कुम्भ से करवाएं।
  • कठिन परिस्तिथियों में “वैदिक मंगल शांति अनुष्ठान“ ही लाभदायक होता है.

जानिए दूषित मंगल के लक्षण और उससे जनित रोगों के लक्षण

मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव के कारण जातक को जीवन में अनेक प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है| अशुभ या पीड़ित मंगल के लक्षण :

  • रक्त सम्बंधित रोग
  • मष्तिष्क ज्वर
  • अल्सर
  • कष्टपूर्ण वैवाहिक जीवन
  • संतान के सुख में कमी आजीवन रहती है.
  • मानसिक रूप से कष्ट रहता है
  • तनाव पूर्ण जीवन बना रहता है  
  • आत्म विश्वास और साहस में कमी
  • अत्यधिक उत्तेजना  
  • मंगल के अशुभ प्रभाव वश दुर्घटनाएं आदि भी होती रहती हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *