श्रवण मास – भगवान् शिव जी की अन्नन्य भक्ति का मास.

श्रवण मास – भगवान् शिव जी की अन्नन्य भक्ति का मास.

प्रिय मित्रों मै आप सभी का सहृदय स्वागत करता हूँ. आज मैं आप सभी को भगवान् शिव के सर्वप्रिय माह सावन की कहानी बताने जा रहा हूँ | जैसा कि जग जाहिर है कि इस सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड में अगर कोई एक भगवान ऐसे हैं जो कि सबसे जल्दी अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते है तो वो केवल एक मात्र शिव शम्भू भोलेनाथ ही हैं जिनको प्रसन्न करना सबसे आसान कार्य है, भगवान् शिव केवल एक लोटे जलाभिषेक से ही प्रसन्न हो जाते है और उनका व्यक्तित्व एकदम भोला है इसीलिये तो चाहे वो देवता हो या असुर, पुरुष हो या महिला या भी कोई अन्य कोई भी प्यार से सच्ची श्रद्धा से उन्हें केवल एक लोटा जल से उनका अभिषेक कर दे तो वो उसी में सन्तुष्ट हो जाते है और शिवकार करने से (ॐ जाप करने से) भी प्रसन्न हो जाते हैं इसीलिये उन्हें भोलेनाथ कहा जाता है और जब श्रवण मास हो तब तो भोलेनाथ को प्रसन्न करना बहुत ही आसान हो जाता है, तो आइये जानते है कि इस सावन मास कि कथा क्या है |

        बहुत प्राचीन बात है एक नगर में एक सेठ रहता था जो कि शिव शम्भू भोलेनाथ का बहुत बड़ा भक्त था उस सेठ के पास वैभव विलासिता कि समस्त वस्तुएं थी जैसे कि लक्ष्मी माता कि बहुत बड़ी कृपा उसे प्राप्त मालूम होती थी, परन्तु उस सेठ के पास सबकुछ होने के बाद भी उसके जीवन में एक सबसे बड़ी कमी यह थी कि उसकी कोई संतान नहीं थी वो दिन-रात इसी सोच में डूबा रहता था कि उसके जाने के बाद इतनी सारी धन – सम्पत्ति को कौन संभालेगा इसका वारिस कब होगा या नहीं होगा उसे यही चिंता दिन – रात खाए रहती थी कि अब क्या होगा | परन्तु इतनी चिंता में खोए रहने के बाद भी वो प्रतिदिन अपने घर के पास भगवान् शिव जी के मंदिर में एक दीपक जलाया करता था और यह प्रतिदिन कि उसका नियम था और उसकी यह अन्नन्य भक्ति देख कर माता पार्वती ने भगवान् शिव जी से कहा कि मै कई वर्षों से इस साहूकार को देख रही हूँ यह प्रतिदिन आपकी भक्ति करता है और किसी चिंता में खोया रहता है हे प्रभु अगर इसकी कोई सी भी दुःख तकलीफ चिंता हो तो कृपया आप अपने इस अन्नन्य भक्त कि दुःख चिंता का हरण करें तब भगवान् शिव जी माता पार्वती जी से कहते हैं कि इस साहूकार के पास पुत्र नहीं है इसलिए यह चिंता में खोया रहता है तो माता पार्वती जी कहती हैं कि प्रभु आप अपने इस भक्त हो पुत्र प्राप्ति का वरदान दीजिये|

तो भगवान् शिव जी कहते हैं कि इसके भाग्य में पुत्र नहीं है और ऐसे में मैं अगर इसे पुत्र प्राप्ति का वरदान भी दूँ तो इसका पुत्र मात्र १२ वर्ष तक कि आयु तक ही जीवित रह पायेगा| तो माता पार्वती ने कहा कि प्रभु यह आपका अन्नन्य भक्त है और आपको इसे पुत्र प्राप्ति का वरदान देना ही होगा नहीं तो ऐसे में कौन आपकी भक्ति करेगा हे प्रभु आप अपने इस भक्त पर दया कीजिये और इसे पुत्र प्राप्ति का वरदान दीजिये, माता पार्वती भोलेनाथ से बार बार आग्रह करती है कि कृपया आप अपने इस भक्त को पुत्र प्राप्ति का वरदान दीजिये तब भोलेनाथ माता पार्वती के कहने पर उस साहूकार को पुत्र प्राप्ति का वरदान देते हैं लेकिन साथ में यह भी कहते है कि वो पुत्र केवल १२ वर्ष तक कि आयु तक ही जीवित रहेगा|

        भगवान शिव जी का यह वरदान पाकर वो सेठ न तो बहुत ज्यादा खुश हुआ और न ही बहुत ज्याद दुखी वह वरदान पाकर भी प्रतिदिन कि भांति अपनी भक्ति में लगा रहा और भगवान शिव जी के वरदान से सेठानी गर्भवती हुई और नौ महीनों के बाद सेठ के घर में एक सुन्दर से बालक ने जनम लिया और सेठानी इतने खुश हुये कि वो चारों दिशाओं में अपनी ख़ुशी व्यक्त करने लगे मनो सारे ब्रम्हाण्ड कि खुशियाँ उन्हें मिल गयी हो | लेकिन सेठ पहले कि भांति ही रह रहा था क्यों कि उसे मालूम था कि उसका पुत्र मात्र १२ वर्ष तक कि आयु तक ही जीवित रहेगा और उसने यह बात अपने तक ही सीमित रखी| जैसे जैसे समय बीतता चला गया और वह बालक ११ वर्ष का हो गया तो सेठानी ने सेठ से कहा कि अब इस बालक का विवाह कर देना चाहिए तो सेठ ने कहा कि अभी तो यह मात्र ११ वर्ष का हुआ है और अब इसे आगे पढाई के लिए हम इसे काशी भेजेंगे और फिर सेठ ने उस बालक के मामा को बुलाया और उसके मामा को कहा कि तुम इसे लेकर काशी जाओ और मार्ग में जहाँ भी रुको वह पर यज्ञ हवन करना और भोजन करना ब्राम्हणों को दान करना दोनों मामा – भांजा आज्ञा पाकर काशी कि और निकल पड़े और जहाँ भी रुके वह पर उन्होंने यज्ञ हवन भोजन और दान किया ऐसे हो मार्ग पर आगे बढ़ते हुये एक नगर पड़ा और उस नगर कि राजकुमारी का विवाह हो रहा था पर जिससे उसका विवाह हो रहा था वह लकड़ा एक आंख से काना था | तब राजकुमारी के पिता कि निगाह सेठ के बेटे पर पड़ी जो कि अत्यंत सुन्दर था फिर राजकुमारी के पिता ने लड़के के मामा से बात कि और कहा कि यह इतना सुन्दर है कि हम इसे घोड़ी पर बैठाकर इसका विवाह राजकुमारी से कर देंगे और बदले में हम तुम्हें बहुत सारा धन देंगे और धन के लालच में आकर लड़के के मामा ने अपने भांजे को राजकुमारी के साथ उसका विवाह करा दिया और विवाह के सारे कार्य संपन्न हो गए अब विवाह  के पश्चात जब लड़का अपने मामा के साथ जाने लगा तब उस लड़के ने राजकुमारी कि चुनरी में लिख दिया कि तुम्हारा विवाह मेरे साथ हुआ है पर तुम्हारे पिता ने जो राजकुमार  तुम्हारे लिए पसंद किया था वह एक आंख से काना है, फिर वह लड़का अपने मामा के साथ काशी चल दिया और इधर राजकुमारी ने अपनी चुनरी पर लिखा हुआ पढ़ लिया और राजकुमारी ने उस काने राजकुमार के साथ जाने से मन कर दिया तो राजकुमारी के पिता ने बगैर राजकुमारी के बारात को विदा कर दिया | इधर मामा भांजा दोनों काशी पहुच गये और एक दिन जब मामा यज्ञ करवा रहा था तब उसने अपने भांजे को यज्ञ में आने के लिए आवाज दिया पर उसका भांजा बाहर नहीं निकला तो मामा परेशान हो गया वह अन्दर गया तो देखा कि उसका भांजा मर चूका था क्यों कि उसकी १२ वर्ष कि आयु पूरी हो चुकी थी अब मामा बहुत परेशान हो गया था कि अब क्या करू अगर शोक प्रकट करूँगा तो सारे ब्राम्हण चले जायेंगे उसने पहले यज्ञ को पूरा किया |

        जैसे ही यज्ञ समाप्त हुआ मामा जोर जोर से रोने लगा उसी समय भगवान् शिव और माता पार्वती वह पर से विचरण करते हुये जा रहे थे तब माता पार्वती ने लड़के के मामा का रोना सुना और भगवान् शिव जी से कहा कि यह कौन है जो इतनी जोर से रो रहा है तब भगवान् शिव जी ने कहा कि यहाँ उस लडके का मामा है जो मेरे वरदान से पैदा हुआ था अब इसकी आयु १२ वर्ष कि हो गयी है और यह लड़का मर गया है, तब माता पार्वती ने कहा कि भोलेनाथ जब इस लड़के के माता पिता को पता चलेगा तो न जाने उनका क्या हाल होगा वह रोते रोते मर जायेंगे कृपया आप इस लड़के को पुनर्जीवित कर दीजिये माता पार्वती जी के बार बार आग्रह करने पर भगवान् शिव जी ने उस लड़के को जीवित कर दिया और लड़का पुनर्जीवित होने के बाद ॐ नमः शिवाय का जाप करता हुआ उठ खड़ा हुआ | अब लड़का और उसका मामा फिर से वापस अपने घर को ओर प्रस्थान कर दिए और वापसी में दोनों उसी नगर में पहुचे जहाँ पर उसका विवाह उस राजकुमारी से हुआ था, राजकुमारी ने उस लड़के को देखा और पहचान गयी और फिर राजकुमारी के पिता ने उस लड़के को बहुत सारा धन – धान्य और अन्य वस्तुएं प्रदान कर उस लड़के के साथ विदा कर दिया इधर लड़के के माता पिता दोनों अपने पुत्र कि राह तकते हुये छत पर खड़े हुये थे और बहुत व्याकुल थे कि अगर उनका पुत्र वापस न लौटा तो दोनों उस छत से कूद कर अपनी जान दे देंगे |

        उतने में ही लड़के का मामा आया और लड़के के माता पिता को यह समाचार दिया कि उसका लड़का एक राजकुमारी को लेकर आ रहा है जिससे उसने विवाह कर लिया है इतना सुनने के बाद भी लड़के के पिता को उसकी बात पर यकीन नहीं हुआ क्यों कि सिर्फ उसको ही पता था कि लड़के कि आयु १२ वर्ष पूरी हो गयी है और वह मर चूका होगा पर लड़के के मामा ने शपथ ले कर कहा कि उसका लड़का विवाह कर राजकुमारी को ला रहा है तब जाकर सेठ ने माना और जब वह उस रात को सो रहा था तब उसके स्वप्न ने भगवान् शिव जी आये और उसको कहा कि मैं तुम्हारी भक्ति और पूजा से अति प्रसन्न हूँ इसलिए मैंने तुम्हारे लड़के को जीवनदान दिया है और इस कथा को कोई भी व्यक्ति सुनेगा तो उसके साड़ी कष्ट दूर हो जायेंगे और यदि कोई भी सावन के महीने में सोमावर को व्रत रह कर इस कथा को सुनेगा या पढ़ेगा तो उसकी सारी मनोकामना पूरी होगी |

इस प्रकार या सावन सोमवार व्रत कि कथा समाप्त होती है आशा करता हूँ कि आप सभी कि यह कथा पसंद आयी होगी भगवान् शिव शम्भू भोलेनाथ आप सभी पर अपना आशीर्वाद प्रदान करे और आप सभी के सारी मनोकामना पूरी हों |

जय शिव शम्भू जय भोलेनाथ हर हर महादेव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *